हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Wednesday, August 2, 2017

लोकतंत्र की छाती पर
ये जस्न मनाते गिद्ध-स्वान
नाचे-गाएँ, कूदे-फांदें,
मद में झुमें, ये बेईमान ।।

करते नर्तन निज तन उघाड़
करें लोकतंत्र की चीरफाड़
कर चीर-फाड नोचें-भींचें
कर-भेद उदर अंतड खींचे ।।

गरदन दबोच आँखे टींचे
बोले गर कोई, जिव्हा खींचें
सरपरस्त जिनको माना वो ही
आज हमारा तन नोचें ।।

चहुँओर मचा हे हाहाकार
घुटने लगी अब हर पुकार
पर कौन सुने? सुनायें किसे?
जब बहरे बने हैं पहरेदार ।।

ओपी   सुमन