ghutan
अरमानो का बूचड़ खाना, बना रहे हैं लोग
बच भाई ,बचके रहना
संभल के चल ऐ मेरे साथी, फंसा रहे हैं लोग
चल भाई, संभल के चलना
सब्जबाग सुन्दर सपनो का, दिखा रहें है लोग
देख भाई, देख के चलना
उसी बाग़ को बेदरदी से, जला रहें हैं लोग
सुन भाई, संभल के रहना
लिए बगल में छुरी प्यार से, डरा रहें हैं लोग
डर भाई, डर के रहना
इक दूजे का गला यहाँ पर, दबा रहे है लोग
चुप भाई, चुप ही रहना
देके लगाम खुद अपनी, अब वे चला रहें है लोग
चल भाई, चलते रहना