हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Wednesday, May 7, 2014



अश्क आँखों में तिरते रहे,
पलकों से मिल बिछड़ते रहे
लुढ़कते हुए रुखसारों से
तेरी तस्वीर पे गिरते रहे

रात भर चाँद में अक्श अपना ढूंढ़ते रहे
चाँदनी रात में दामन अपना भिगोते रहे
तुमने कहा था चाँद मेरा दिल चाँदनी हो तुम
इसी भरम में हम खुद से बिछड़ते रहे

नज़र सितारों पे  कहेंगे मेरा चाँद हो तुम
मन में छिपा के उनको कहेंगे चाँदनी हो तुम
जमाना-ए-दस्तूर याद रखना सुमन
चाँदनी रहेगी सदा, इसी भ्रम में न रहना तुम

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