हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Monday, June 30, 2014

मन की वेदना


 
 कोरा बर्तन सा वो मन
लिपटा माँ के आँचल में
भरा गया प्यार व् ममता से
पिता के स्नेहल सहारे से
दादी की लाठी से
दादु के चश्मे से
बहन के नखरों से
सिंचित ये मन
आज
समय की तपन से
मजबूरियों की उबलन से
वाष्पित वो मन
आज शेष है खुरचन
opsuman