मन की वेदना
कोरा बर्तन सा वो मन
लिपटा माँ के आँचल में
भरा गया प्यार व् ममता से
पिता के स्नेहल सहारे से
दादी की लाठी से
दादु के चश्मे से
बहन के नखरों से
सिंचित ये मन
आज
समय की तपन से
मजबूरियों की उबलन से
वाष्पित वो मन
आज शेष है खुरचन
opsuman
कोरा बर्तन सा वो मन
लिपटा माँ के आँचल में
भरा गया प्यार व् ममता से
पिता के स्नेहल सहारे से
दादी की लाठी से
दादु के चश्मे से
बहन के नखरों से
सिंचित ये मन
आज
समय की तपन से
मजबूरियों की उबलन से
वाष्पित वो मन
आज शेष है खुरचन
opsuman
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