हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Tuesday, May 13, 2014


चेहरे बदल जीते बिना जज्बात यहाँ पर लोग
करते नहीं शिकवा कटा कर गला यहाँ पर लोग

बेनज़र कर दिया सबको फ़ितरते यार ये उनकी
बसाकर आस्तीं मैं सांप क्यों रोते यंहा पर लोग

बनाकर दायरा बैठे घुटते यहाँ पर लोग
दबाकर फ़ितरते-गैरत जीते यहाँ पर लोग

जगाये कौन यहाँ उनको जो जागते-सोते
भरोसे भाग्य के बैठे कोसे यहाँ पर लोग

जमानेहाल बदलजाये ये मुमकिन हो नहीं सकता
जबतलक तु नहीं बदले ये करम हो नहीं सकता

बदलकर सीरतें अपनी दिखा दो इस जन्हा को तुम
करलो यकीं खुद पर बिना ये हो नहीं सकता

दिखा दो आसमां को तुम कर सुराख़ हाथो से
तोड़ दो बेड़ियां खुद की पड़ी थी हाथ सालों से

ओ पी सुमन- १२-५-२०१४

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