हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Saturday, May 3, 2014

चित्र साभार गूगल

संवेदनहीनता 

सामने बनती बहुमंज़िला इमारत
मैं देखता हर रोज़ वही क्रम
सेकड़ो मज़दूर लग जाते
मशीन की तरह अपने तन से
बिना भय के चढ़ जाते
बल्लियों पर
जान की परवाह किसे
मन में है सिर्फ दिहाड़ी i
कोई हादसा होता
दौड़ पड़ते सभी साथी
सँभालने को
मैनेजर दौड़ता हांफता सा
खोजता हाज़िरी रजिस्टर
में नाम पीड़ित का
मिटा देता नामोनिशान उस पाने का
घायल मजदूर बेनाम पहुंचा दिया जाता
खैराती दवाखाने...

ओ पी सुमन

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