हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Tuesday, April 29, 2014


अनगिनत विचार
मन मैं बार बार
नहीं रुकते रोके
लड़ते झगड़ते से शब्द
अपनी जगह को लेकर बेचैन
छोड़ जाते टूटीफुटी रचना
उतर आये जहन से स्क्रीन पर
शरीर तो बन गया
पर अभी प्राण नहीं
तुम्हारे बिना.

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