MY EXPERIMENTS AND THOUGHTS
FICTION WRITING, POETRY, STORIES, NOVEL, MY VIEWS TOWARD SURROUNDINGS
हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं
मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
Tuesday, April 29, 2014
अनगिनत विचार मन मैं बार बार नहीं रुकते रोके लड़ते झगड़ते से शब्द अपनी जगह को लेकर बेचैन छोड़ जाते टूटीफुटी रचना उतर आये जहन से स्क्रीन पर शरीर तो बन गया पर अभी प्राण नहीं तुम्हारे बिना.
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