मेरी अभिलाषा
शब्दांे का ऐसा महल जिसमें प्राण हों
संासो के साथ दिल धड़कता हो
कोई वहां से गुजरे फक्र हो उसे वहां जाने का
ऐसा एक महल हो मेरे शब्दों का।
कवि, कविता तो आषिक, माषूक पाए,
गमगीन उसकी पनाह में बेगम हो जाए
ऐसा महल हो मेरे शब्दों का ।।
कंगुरे, छत, और दीवारें और
आंगन से नींव तक के शब्द,
जो खुद बोलें
बता तु क्या चाहता है?
जो कुछ लेना हे ले जा
बस खाली हाथ ना जा दर से
ऐसा महल हो मेरे शब्दों का।
मेरे महल का एक एक शब्द
हर मन में बस जाए हर पल पोषित हो
शब्द उसके महल की नींव बनें।
मेरी अभिलाषा को नाम
कविता, गीत, कहानी उपन्यास
कुछ भी मिले, बस यही मेरी अभिलाषा।
सिर्फ एक चाह है मेरे शब्दों आदर मिले
साभार में मेरा भी जिक्र आए।
ऐसा महल को मेरे शब्दों का
No comments:
Post a Comment