रविवार दिनांक 23.03.2014
होटल स्वरूप विलास
केमिस्ट टाइगर मिशन 2017, के बेनर तले अलवर डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एशोसिऐशन द्वारा आयोजित एजुकेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। सुबह दष बजे अलवर जिले के सभी समाजसेवी केमिस्ट बुद्वीजिवीयों को सशुल्क आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम का प्रथम सोपान होटल के भव्य परिसर में भगवान इंद्र के आषीर्वाद से सुनियोजित तरीकों से प्रारंम्भ हुआ। इस आयोजन का प्रमुख उद्वेष्य केमिस्टो को षिक्षित करना जिससे कि सिड्युल एच1 भूत का भय समाप्त हो सके।
प्रवेष द्वार पर लम्बी कतार ने अपने ही अर्थदान से स्वयं का सम्मान करवाया तथा स्वयं की पहचान वह भूल न जाए उनके गलों में एक विषेष परिचय पत्र लटकाया गया। कुछ विषेष आदरणिय मानुभावों की राजाषाही अंदाज में स्वयं ने साफापोषी करवाई (स्वंय के अर्थदान से)। उनका रौब व मिथ्याभिमान यह प्रकट कर रहा था कि समाजसेवी समुदाय में उनका कितना मान है। सुगंधमय वातावरण (अल्पाहार की सुगंध) कतार को लम्बा किए जा रहा था।
मुख्य अतिथि गणों के आगमन पर अभिवादन स्वरूप अल्पाहार की जंग का ऐलान किया गया। प्रष्ठभूमि में मधुर संगीत लगातार योद्वाओं को प्रेरित कर रहा था। 12 बजे तक सारा समुदाय एक़ित्रत हो चुका था। इतनी भीड़ का अंदाजा शायद आयोजकों को पहले से ही था तो नियोजित तरीके से यहां छटनी करना अनिवार्य हो गया; इस भय से कि कहीं ज्यादा बुद्विमान समाजसेवी लोग इस समारोह को विफल न कर दें। अतः यह जरूरी हो गया कि जो लोग समाजसेवा के दायित्व को समझते हैं, वे ही ओडिटोरियम में पहुंचे। प्रयोजक महोदय की इस योजना का सकारात्मक परिणाम मिला, जो भोजनभट्ठ थे, वो यहां से ही समाजसेवा के लिए प्रस्थान कर गये।
यहां से विजित प्रबुद्व लोगों के काफिले ने मय गाजेबाजे के साथ ओडिटोरियम के लिए प्रस्थान किया। राजकीय समारोह की तर्ज पर काफिला ओडिटोरियम पहुंचा। प्रथम तीन पंक्तियॉं विशिष्ट दरबारियों को लिए आरक्षित रखीं गयी। शेष सीटों पर अपनी-अपनी प्रकृति के सहसमाजसेवकों के साथ वे लोग विराजे जो इस उम्मीद में आये थे कि यहां पर कुछ शिक्षा प्राप्त कर आधुनिक तरीकों से समाज सेवा कर सके।
फीता काटा गया जैसे की आज ही इस राजदरबार का प्रथम दिन हो। सभी ने अपने अपने नामित स्थान पर आशन ग्रहण किया। उदघोषिका महोदया ने माइक संभाल कर कार्यक्रम का संचालन बहुत ही रोचकता से प्रारंभ किया। माननीय महाराज का माल्यार्पण कर टोपी पहनाई गई। तलवार भेंट कर हमनें उन्हें अपने कर्तत्व्य पालन करने की याद दिलाई। टोपी पहनाने का क्रम योग्यतानुसार जारी रहा। इस राजदरबार में इस स्थानिक समुदाय के वास्तविक पालक, के थोड़ा लेट आने के आष्वासन उपरांत ज्ञानषाला की शुरूआत की गई। साहब अंर्तयामी हैं! जानते थे, अखिर आप ने काफी समय इस समुदाय की अगुवाई की है, कि इस समुदाय पर इस तरह की ज्ञान शालाओं का क्या प्रभाव होना है?
सबसे पहले महाराष्ट्र के केमिस्ट समुदाय की काया पलटने वाले तथा फार्मासिस्ट को स्वभिमान जीवनषैली प्रदान करने वाले विषिष्ट अतिथि को बुलाया गया। महाराष्ट्र में आपके अथक प्रयासों से इस प्राणी को पहचान दिलाई यह हमारे लिए एक उम्मीद है। मंच पर हम आपसे यह उम्मीद कर रहे थे कि शायद आप हमारे पक्ष में कुछ बोलेंगे। लेकिन जिस मंच पर आप थे शायद उसकी मर्यादा के ख्याल ने आप को न बोलने दिया हो।
आपने आधुनिकता के साथ समाजसेवा के इस व्यापार के नवीनीकरण पर बल दिया। शायद आप इस बात से अनभिज्ञ थे कि राजस्थान की कर्मभूमि ने ऐसे ऐसे सपूतों को जन्म दिया है जिन्होंने दुनिया को व्यापार करना सिखाया है। यहां पर 1500 रूपयों के लिए फार्मासिस्ट अपनी आबरू बेच देता है। हमारे यहां फार्मासिस्ट कौनसा प्राणी होता है, इस समाज के अलावा कोई नहीं जानता, तथा इस प्राणी की पहचान को हमेषा गुप्त रखा जाता है। फार्मासिस्ट को इतना विवेकहीन प्राणी बना दिया गया है कि वह शायद ही कभी ये जान पाए की उसकी अहमियत क्या है। उसका मनोबल इतना गिरा दिया गया है कि उसके हाने या न होने से सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता। दो चार प्रतिभाषाली भाई सरकार में पहुंच भी गये तो उनको भी इन बेचारे प्राणीयों से कोई सरोकार नहीं । यह प्राणी स्वयं ही इसके लिए जिम्मेदार है या कोई और यह एक शोध का विषय हो सकता है। राजस्थान में साफ देखा जा सकता है आधे से ज्यादा फार्मेसी कोलेज खाली पड़े है। कोई गलती से या मजबूरी में फार्मेसी कर भी लेता है तो यहां की सरकार को उसकी कोई जरूरत नहीं। पूंजीपतियों के लिए इसमें बहुत संभावनाएं हैं पर जो पढ़लिख कर अपना भाग्य लिखना चाहता है उसके लिए यहां कोई स्कोप नहीं। यहां की सरकार फार्मेंसी एक्ट की पालना स्वयं नहीं करती पर जनता इसकी अवहेलना नहीं कर सकती।
तत्पष्चात सरकार के प्रमुख प्रतिनिधी ने इस सिड्यूल की पालना के नैतिक कर्तव्य को समझाया ताकि हमारी भावी पीढी का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके। केमिस्ट समुदाय के समाज में महत्व को याद दिलाया गया। आपने कम शब्दों में ही इस समुदाय को एक नई विचारधारा प्रदान की।
एक दो प्रभावी ज्ञानोपदेषों के बाद समुदाय से आपत्तियां मांगी गई जिनमें अधिकांषतः झोले छापों के संदर्भ में थी। किसी पिड़ित फार्मासिस्ट ने सरकार के निषुल्क दवा वितरण केंद्रो पर नियुक्ति के संदर्भ में सरकार की मंषा जाननी चाही । जिसका जवाब बहुत व्यंगात्मक शैली में दिया गया। खैर कोई बात नहीं वैसे यह मंच भी उचित नहीं था तो जिस जवाब की आषा थी वही प्राप्त हुआ। एक और रोचक सवाल उदघोषिका महोदया द्वारा पूछा गया जिसका कोई भी व्यवहारिक प्रतिउत्तर प्राप्त न होने से छोभित हो आषुरचित काव्यमय शैली में एक आम आदमी की पीड़ा को उजागर किया।
काफी समय बाद शायद उनकी अंर्तआत्मा की आवाज पर हमारे फार्मासिस्ट समुदाय के प्रतिनिधी ने फामोसिस्टों के स्वाभिमान को बचाने की चेष्टा की उस समय ऐसा लगा की हमने एक सही फार्मासिस्ट प्रतिनिधि को चुना है जो कि हमें बेआबरू नहीं होने देगा ।
इसके उपरांत कुछ विषिष्ट समाजसेवीयों ने अपना सम्मान महाराज द्वारा करवाया।
समारोह के अंत में एक रहस्य से पर्दा उठाया गया कि इस समारोह का एजेंडे तीन थे।
1. मनोरंजन
2. मनोरंजन
3. मनोरंजन
तीसरा एजेंडा रात्रि को सम्पन्न हुआ जो कि कैमिस्ट समुदाय के समाजिक दायित्व पर प्रष्न चिन्ह था। भोजनोपरांत अभद्र नृत्य प्रोग्राम का के इस आयोजन पर भगवान इंद्र को भी इतना क्षोभ हुआ की उन्हें मजबूर होकर अपना प्रकोप दिखाना पडा।
होटल स्वरूप विलास
केमिस्ट टाइगर मिशन 2017, के बेनर तले अलवर डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एशोसिऐशन द्वारा आयोजित एजुकेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। सुबह दष बजे अलवर जिले के सभी समाजसेवी केमिस्ट बुद्वीजिवीयों को सशुल्क आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम का प्रथम सोपान होटल के भव्य परिसर में भगवान इंद्र के आषीर्वाद से सुनियोजित तरीकों से प्रारंम्भ हुआ। इस आयोजन का प्रमुख उद्वेष्य केमिस्टो को षिक्षित करना जिससे कि सिड्युल एच1 भूत का भय समाप्त हो सके।
प्रवेष द्वार पर लम्बी कतार ने अपने ही अर्थदान से स्वयं का सम्मान करवाया तथा स्वयं की पहचान वह भूल न जाए उनके गलों में एक विषेष परिचय पत्र लटकाया गया। कुछ विषेष आदरणिय मानुभावों की राजाषाही अंदाज में स्वयं ने साफापोषी करवाई (स्वंय के अर्थदान से)। उनका रौब व मिथ्याभिमान यह प्रकट कर रहा था कि समाजसेवी समुदाय में उनका कितना मान है। सुगंधमय वातावरण (अल्पाहार की सुगंध) कतार को लम्बा किए जा रहा था।
मुख्य अतिथि गणों के आगमन पर अभिवादन स्वरूप अल्पाहार की जंग का ऐलान किया गया। प्रष्ठभूमि में मधुर संगीत लगातार योद्वाओं को प्रेरित कर रहा था। 12 बजे तक सारा समुदाय एक़ित्रत हो चुका था। इतनी भीड़ का अंदाजा शायद आयोजकों को पहले से ही था तो नियोजित तरीके से यहां छटनी करना अनिवार्य हो गया; इस भय से कि कहीं ज्यादा बुद्विमान समाजसेवी लोग इस समारोह को विफल न कर दें। अतः यह जरूरी हो गया कि जो लोग समाजसेवा के दायित्व को समझते हैं, वे ही ओडिटोरियम में पहुंचे। प्रयोजक महोदय की इस योजना का सकारात्मक परिणाम मिला, जो भोजनभट्ठ थे, वो यहां से ही समाजसेवा के लिए प्रस्थान कर गये।
यहां से विजित प्रबुद्व लोगों के काफिले ने मय गाजेबाजे के साथ ओडिटोरियम के लिए प्रस्थान किया। राजकीय समारोह की तर्ज पर काफिला ओडिटोरियम पहुंचा। प्रथम तीन पंक्तियॉं विशिष्ट दरबारियों को लिए आरक्षित रखीं गयी। शेष सीटों पर अपनी-अपनी प्रकृति के सहसमाजसेवकों के साथ वे लोग विराजे जो इस उम्मीद में आये थे कि यहां पर कुछ शिक्षा प्राप्त कर आधुनिक तरीकों से समाज सेवा कर सके।
फीता काटा गया जैसे की आज ही इस राजदरबार का प्रथम दिन हो। सभी ने अपने अपने नामित स्थान पर आशन ग्रहण किया। उदघोषिका महोदया ने माइक संभाल कर कार्यक्रम का संचालन बहुत ही रोचकता से प्रारंभ किया। माननीय महाराज का माल्यार्पण कर टोपी पहनाई गई। तलवार भेंट कर हमनें उन्हें अपने कर्तत्व्य पालन करने की याद दिलाई। टोपी पहनाने का क्रम योग्यतानुसार जारी रहा। इस राजदरबार में इस स्थानिक समुदाय के वास्तविक पालक, के थोड़ा लेट आने के आष्वासन उपरांत ज्ञानषाला की शुरूआत की गई। साहब अंर्तयामी हैं! जानते थे, अखिर आप ने काफी समय इस समुदाय की अगुवाई की है, कि इस समुदाय पर इस तरह की ज्ञान शालाओं का क्या प्रभाव होना है?
सबसे पहले महाराष्ट्र के केमिस्ट समुदाय की काया पलटने वाले तथा फार्मासिस्ट को स्वभिमान जीवनषैली प्रदान करने वाले विषिष्ट अतिथि को बुलाया गया। महाराष्ट्र में आपके अथक प्रयासों से इस प्राणी को पहचान दिलाई यह हमारे लिए एक उम्मीद है। मंच पर हम आपसे यह उम्मीद कर रहे थे कि शायद आप हमारे पक्ष में कुछ बोलेंगे। लेकिन जिस मंच पर आप थे शायद उसकी मर्यादा के ख्याल ने आप को न बोलने दिया हो।
आपने आधुनिकता के साथ समाजसेवा के इस व्यापार के नवीनीकरण पर बल दिया। शायद आप इस बात से अनभिज्ञ थे कि राजस्थान की कर्मभूमि ने ऐसे ऐसे सपूतों को जन्म दिया है जिन्होंने दुनिया को व्यापार करना सिखाया है। यहां पर 1500 रूपयों के लिए फार्मासिस्ट अपनी आबरू बेच देता है। हमारे यहां फार्मासिस्ट कौनसा प्राणी होता है, इस समाज के अलावा कोई नहीं जानता, तथा इस प्राणी की पहचान को हमेषा गुप्त रखा जाता है। फार्मासिस्ट को इतना विवेकहीन प्राणी बना दिया गया है कि वह शायद ही कभी ये जान पाए की उसकी अहमियत क्या है। उसका मनोबल इतना गिरा दिया गया है कि उसके हाने या न होने से सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता। दो चार प्रतिभाषाली भाई सरकार में पहुंच भी गये तो उनको भी इन बेचारे प्राणीयों से कोई सरोकार नहीं । यह प्राणी स्वयं ही इसके लिए जिम्मेदार है या कोई और यह एक शोध का विषय हो सकता है। राजस्थान में साफ देखा जा सकता है आधे से ज्यादा फार्मेसी कोलेज खाली पड़े है। कोई गलती से या मजबूरी में फार्मेसी कर भी लेता है तो यहां की सरकार को उसकी कोई जरूरत नहीं। पूंजीपतियों के लिए इसमें बहुत संभावनाएं हैं पर जो पढ़लिख कर अपना भाग्य लिखना चाहता है उसके लिए यहां कोई स्कोप नहीं। यहां की सरकार फार्मेंसी एक्ट की पालना स्वयं नहीं करती पर जनता इसकी अवहेलना नहीं कर सकती।
तत्पष्चात सरकार के प्रमुख प्रतिनिधी ने इस सिड्यूल की पालना के नैतिक कर्तव्य को समझाया ताकि हमारी भावी पीढी का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके। केमिस्ट समुदाय के समाज में महत्व को याद दिलाया गया। आपने कम शब्दों में ही इस समुदाय को एक नई विचारधारा प्रदान की।
एक दो प्रभावी ज्ञानोपदेषों के बाद समुदाय से आपत्तियां मांगी गई जिनमें अधिकांषतः झोले छापों के संदर्भ में थी। किसी पिड़ित फार्मासिस्ट ने सरकार के निषुल्क दवा वितरण केंद्रो पर नियुक्ति के संदर्भ में सरकार की मंषा जाननी चाही । जिसका जवाब बहुत व्यंगात्मक शैली में दिया गया। खैर कोई बात नहीं वैसे यह मंच भी उचित नहीं था तो जिस जवाब की आषा थी वही प्राप्त हुआ। एक और रोचक सवाल उदघोषिका महोदया द्वारा पूछा गया जिसका कोई भी व्यवहारिक प्रतिउत्तर प्राप्त न होने से छोभित हो आषुरचित काव्यमय शैली में एक आम आदमी की पीड़ा को उजागर किया।
काफी समय बाद शायद उनकी अंर्तआत्मा की आवाज पर हमारे फार्मासिस्ट समुदाय के प्रतिनिधी ने फामोसिस्टों के स्वाभिमान को बचाने की चेष्टा की उस समय ऐसा लगा की हमने एक सही फार्मासिस्ट प्रतिनिधि को चुना है जो कि हमें बेआबरू नहीं होने देगा ।
इसके उपरांत कुछ विषिष्ट समाजसेवीयों ने अपना सम्मान महाराज द्वारा करवाया।
समारोह के अंत में एक रहस्य से पर्दा उठाया गया कि इस समारोह का एजेंडे तीन थे।
1. मनोरंजन
2. मनोरंजन
3. मनोरंजन
तीसरा एजेंडा रात्रि को सम्पन्न हुआ जो कि कैमिस्ट समुदाय के समाजिक दायित्व पर प्रष्न चिन्ह था। भोजनोपरांत अभद्र नृत्य प्रोग्राम का के इस आयोजन पर भगवान इंद्र को भी इतना क्षोभ हुआ की उन्हें मजबूर होकर अपना प्रकोप दिखाना पडा।
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