मैने निजि अनुभवों को कलमबद्व किया है जो शायद आपको पसन्द आयें या न आयें एक जागरूक पाठक से में आलोचना या सराहना की अपेक्षा रखता हॅूं।
18 फरवरी 2014 दोपहर 2-00
खाली समय में अक्सर में यू टयूब पर कुछ कुछ सर्च कर लिया करता था। उस दिन भी वही कर रहा था। किसी कोमेडी मुवी का कोई अंश को देखकर मु-हजये अपने एक मित्र की याद आ गई। वो शख्स इतना हॅसमुख है कि एक बार तो उसकी शक्ल देखकर ही हॅसी आ जाती है।
काफी दिनों से उसे देखा नहीं था सो मन में विचार आ कर अटक सा गया था। काफी सोचने के बाद भी कोई कारण नजर नहीं आया तो उसे फोन लगा कर पूछा कि क्या बात है आजकल दिखाई नहीं देते।
उसकी आवाज सुनकर कुछ अजीब सा महसूस हुआ
विकास ने कहा- कुछ नहीं बस ऐसे ही कहकर मौन हो गया........उसकी लम्बी सांस की आवाज फोन से होकर मेरे कानों में वेदना सी बनकर टकराई......
कुछ पल बाद उसने पूछा, -ंउचय ’कैसे याद किया, भैया, कोई काम हो तो बताओ, उसने ज्यादा बात न करने के अन्दाज में जवाब दिया। उसकी आवाज साफ-ंउचयंसाफ बयॉं कर रही थी कि वह किसी घोर संकट में है और जैसे किसी मजबूरी में मु-हजयसे बात कर रहा हो।
मैंने पूछा-ंउचय तबीयत तो ठीक है न? क्या बात है कुछ तो बता? कुछ नहीं भैया, इतना कहते ही उसकी आवाज लड़खडा़ गई ओर फोन रख दिया।
मैं एक अजीब सी फिलिंग महसूस कर रहा था जो कि काफी समय पश्चात मेरे दिल पर हल्का सा भार लिए महसूस हो रही थी। फिर मन में ख्याल आया कि कहीं प्यार-ंउचयंव्यार का चक्कर तो नहीं, फिर दूसरा विचार आया कि मोहित तो सीधा साधा लडका है कहां इन शहरी लडकियों के चक्कर में आ सकता है।
क्या? ऐसा हो भी सकता है कोई बड़ी बात तो है नहीं, लडका स्मार्ट है, स्पोर्टमैन-ंउचयसा लगता है, खास बात यह है कि वो हॅंसमुख है। मैने चिंतावश उसे दोबारा फोन लगाया लेकिन वह स्विच आफ आ रहा था।
पुनः विचारों की लडी़ बनना शुरू हो गई, बात क्या हो सकती है? उसे कभी इतना गंभीर तो कभी नही देखा। कुछ तो बात है? मन में कुछ घबराहट भी होने लगी थी, अनेको कल्पित दृश्य ख्यालों में विचरण करने लगे। विचारों का क्रम लगभग 2 घंटे तक चला । उस समय शाम के 5 बजे होंगे। अपनी बाईक उठाई और उसके कमरे की तरफ चल पडा।
मैं लगभग दश मिनट में उसके रूम पर पहुंचा। दरवाजा बंद था, तीन चार बार नोक करने पर भी कोई प्रतिउत्तर नहीं मिला तो अब चिंता का ब-सजय़ गई! मकान मालकिन भी आवाज सुनकर बाहर आ गई। आंटी ने दरवाजे को खटखटाने के साथ आवाज लगाई, इस बार दरवाजा खोला तो अपने कानोे से लीड हटाते हुए बोला -ंउचयंहां, आंटी, ओर फिर उसकी दृष्टि मु-हजय पर पड़ी, थोडा सकुचाते हुए बोला ’भैया आप! इस समय! आंटी बीच में ही बात काटते हुए बोली ’पिछले दश मिनट से पुकार रहे थे। मोहित कुछ न बोला मु-हजये अंदर बुला कर बेतकल्लुफी से दरवाजा बंद कर दिया।
कुछ देर मौन रहने के पश्चात हल्की सी बनावटी मुस्कान से बोला-ंउचय मैं गाने सुन रहा था सो आवाज नहीं आई। वह मोबाइल बिस्तर पर पटक कर पानी लेने गया, उसकी गैरहाजिरी में मैंने उसका मोबाइल उठा लिया जिस में अभी भी लीड लगी हुई थी तथा कोई गाना अभी भी चल रहा था, जैसे ही मैंने लीड हटायी पूरे कमरे में गाना गूंज उठा, ’अच्छा सिला दिया तुने मैरे प्यार का’
http://www.youtube.com/watch?v=nBtPj_kWkY8
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