मैं जूती........
सभी ने मुझे उपयोग किया
सभी ने मेरा उपभोग किया,
मैं सदा निर्विरोध, निःप्रष्न।
कभी नहीं कहा मैने,
मेरा काम वो नहीं
हर रूप मैं तेरा साथ दिया।
मुझ से न पूछा कभी किसी ने,
तु क्या चाहती है?
क्या नहीं है मेरे पास
फिर भी क्यों अछूती मैं
क्या नहीं किया मैंने,
कहां साथ नहीं दिया मैंने।
राज से लेकर हर काज का साधन बनी में,
क्यों भूल गये तुम?
बारह साल मेंने भी वियोग सहा,
मैं भी राजरानी रही हॅू
सतयुग में मेरा भी मान था,
क्यों भूल गये तुम?
समय ने थोडा बदला जरूर है,
मेरा नाम व रूप जरूर संवारा है,
तेरी पहचान मु-हजयसे जरूर होने लगी है,
पर मेरा काम भी तो बढ़ा दिया
मैं तो अपने निमित्त काज से खुश हॅू,
फिर क्यों कराते हो मुझसे वो सब,
जिससे मुझ अपयश सहना पडता हे,
मेरे मालिक! तेरा यश भी तो इसमें नहीं।
सभी ने मुझे उपयोग किया
सभी ने मेरा उपभोग किया,
मैं सदा निर्विरोध, निःप्रष्न।
कभी नहीं कहा मैने,
मेरा काम वो नहीं
हर रूप मैं तेरा साथ दिया।
मुझ से न पूछा कभी किसी ने,
तु क्या चाहती है?
क्या नहीं है मेरे पास
फिर भी क्यों अछूती मैं
क्या नहीं किया मैंने,
कहां साथ नहीं दिया मैंने।
राज से लेकर हर काज का साधन बनी में,
क्यों भूल गये तुम?
बारह साल मेंने भी वियोग सहा,
मैं भी राजरानी रही हॅू
सतयुग में मेरा भी मान था,
क्यों भूल गये तुम?
समय ने थोडा बदला जरूर है,
मेरा नाम व रूप जरूर संवारा है,
तेरी पहचान मु-हजयसे जरूर होने लगी है,
पर मेरा काम भी तो बढ़ा दिया
मैं तो अपने निमित्त काज से खुश हॅू,
फिर क्यों कराते हो मुझसे वो सब,
जिससे मुझ अपयश सहना पडता हे,
मेरे मालिक! तेरा यश भी तो इसमें नहीं।
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