हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Tuesday, February 18, 2014

 कमरे में गूंजते संगीत ने एक दम माहोल को और भी गमगीन बना दिया, मैने तुरंत वोल्यूम को कम कर दिया और मोहित के आने का इंतजार करने लगा।
मोहित ने कमरे में प्रवेश करते ही समझ लिया था कि जिस राज को मैने सभी से छुपा कर रखा था आज खुलने जा रहा है।
उसने पानी का गिलाश आगे किया, मैने गिलाश पकड़ते हुए उसके चेहरे को गौर से देखने लगा। गालों पर आंशूओं की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। पलकें भी सूख चुकि थी। उसे अपने पास बिठाया तथा उसे सान्त्वना देते हुए कुछ साहस देने का प्रयत्न किया ताकि वह कुछ बोल सके।
मैने पूछा- नाम क्या है?
वह दबे हुए स्वर में बोला- नीशा.....
उसके नाम लेने के साथ उसकी नजर एक नीली डायरी पर पडी........ एक हाथ से लपकते हुए वह डायरी मेरी तरफ कर दी।
डायरी के ऊपर लाल स्केच पैर से बड़ी खुबशुरती से लिखा हुआ था, जिसे लिखने में काफी समय लगा होगा, ’नीशा’
क्या है इसमें, मैने पूछा।
मेरी प्रेम कहानी..........
डायरी का पहला पृष्ठ.......... दिनांक 4 फरवरी
4 फरवरी देख मैने पूछा- अभी जो कुछ दिन पहले गई है वह वाली?
नहीं, यह नहीं पिछले साल वाली, 2013
डायरी का साइज देखकर दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर पड़ी..... शाम के 6ः14 हो रहे थे। एक बार तो सोचा इसे साथ ले जाता हॅू पर यह सोच कर रह गया कि यह फिर अकेला न जाने क्या कर बैठे।
उसकी लिखावट इतनी स्पष्ट थी की प
यहां से शुरू होती है यह प्रेम कहानी...............

04 फरवरी 2013


   सुबह से ही मौसम खुषनुमा हो रहा था, अभी थोड़ी देर पहले ही बारिष की बौछारों में पेडों ने स्नान किया था शायद ये किसी उत्सव की तैयारी में प्रफ्फुलित हो रहें थै। हवा जरूर मंद  थी लेकिन कभी कभी बगिचे की तरफ से -हवा का झोंका आता तो मानो ऐसा लगता कि कोई इत्र का छिडकाव कर रहा हो। सुन्दर पुष्पलताएं भी स्वागतातुर हो रहीं थीं। जैसे ही कोलेज के मैन गेट से पैदल-ंपैदल आगे ब

    दश बजते ही पुरा कोलेज कैंपस भर सा गया, एक तरफ लेडिज स्टाफ अधिकांशतः पीले वस्त्रों में था तो लड़कियां भी बिना कोई पूर्व उदघोषणा के पीले परिधानों में नजर आ रही थी, आज पूर्व और पश्चिम संस्कृतियां गले मिल रही थी। पीले आधूनिक परिधानों का अद्भुत मेल था। सभी लड़के लडकियाॅं कान्फ्रेस हाॅल में एकत्रित होने लगे थे। बांयी तरफ लड़कियों ने कब्जा जमा लिया था तो दूसरी तरफ लड़के अपने-अपने गु्रपों में व्यवस्थित होने लग गये थै। मैं भी अपने एक मित्र के साथ आगे से दूसरी पंक्ति में व्यवस्थित हो गया। सभी लड़को की नजर बांई और निर्निमेष अपना पोषण प्राप्त कर रहीं थी। लगभग सभी समुहों में अधिकांशतः वार्तालाप कुछ ही शब्दों में सारांशित थी जैसे मस्त, हैयर स्टाइल, आंखें, फिगर, मजा आ जाए, तेरी वाली, मेरी वाली,

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