हे ईश्वर मैं उस हर नियामत के लिए तेरा शुक्रगुजार हूँ जो तूने मुझे अता कि हैं

मेरे लिए सत्य यह है इस वक्त आप इसे पढ़ रहे हैं.......... धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

Sunday, February 23, 2014

 अपने बच्चे के रोने की आवाज से विचलित बार-बार धूप देखकर दोपहर की छुट्टी होने का इंतजार कर ही रही थी की मालिक का टिफिन लेकर एक मजदूर आया।
मालिक ने उसे डांटते हुए कहा- ’इतनी देर कैसे लगा दी मै भूख से मरा जा रहा था, मैने तो होटल से खाना मंगवा कर खा लिया।’
मजदूर बोला-’मालिक इस टिफिन का क्या करूं? मालिक ने उसे एक कोने में कुत्तों के खाने के लिए छोड़ने का हुक्म देकर आराम करने चला गया।
दोपहर की छुटट्ी में वो अपने बच्चे को दूध पिलाती हुई कपड़े में लिपटी रोटी निकाल कर कोने में पडे महकते भोजन की खुषबु से व्याकुल होकर न जाने क्या सोचकर रोटी को खाने लगी।
क्या सोचा होगा उसने?
मैं एक अमीर घर में पैदा हुई होती या ़़़़़़़़़.............।

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